ये प्रश्न ही आज परीक्षा है..
क्या साक्षरता ही शिक्षा है...
पागलो की तरह लगे हुए है...
जीवन आबाद बनाने मे...
पढना लिखना सीखते हुए..
अपने शौक भुनाने मे...
ना समझ स्वयं की...
ना काल चक्र की...
ना जन्म मृत्यु अध्यात्म ज्ञान पर ....
वेद पुराणों की बात हमने मानी है..
ये धर्म ग्रन्थ आज के युग मे...
लगते बस पुरानी कहानी है...
कर रहे है गलती बार बार...
अगर गलत बात ही हमने सही मानी है...
क्योंकी यही संस्कार है मैं हु बड़ा...
और हम ही सबसे बड़े ज्ञानी है...
इंसान ही तो आज के युग मे...
सबसे बडा अभिमानी है...
खुद को भगवान मानने मे..
नहीं उसको कोई परेशानी है...
क्या अक्षर की पहचान दुनिया मे ...
कर देती पुरी दीक्षा है...
ये प्रश्न ही आज परीक्षा है क्या साक्षरता ही शिक्षा है....
नौकरशाही ही हावी है...
शिक्षा सिर्फ किताबी है...
जो तलाश होती थी जीवन दर्शन की...
वो तलाश ही हुई नाकाफी है...
मृत्यु जन्म रहस्य खोज छोड़ कर..
प्रकृति से हुई शुरू नाइंसाफी है...
शिक्षा को सिर्फ बोल बोल कर...
क्या ताउम्र रटवाना काफ़ी है...
पढ लिख कर जो कर्म कर रहे...
उन कर्मो से सब पापी है....
इतिहास वर्तमान और भविष्य...
चीख चीख के कहते कहानी है....
हर विषय है कमजोर यहाँ....
लगा दिया पैसा पर ज़ोर यहाँ...
अध्यात्म ज्ञान की छोड़ कर खोज..
कर दी शुरू दुनिया मे मौज...
शिक्षा का यही बस रह गया उपयोग...
लग गया पैसों का रोग...
आएगा वो भी एक दिन संयोग...
जब सही से शुरू होगा योग...
गुण भूल अपने कर्मो का फल...
हर मनुष्य यहाँ रहा है भोग...
हर तरफ विलाप और वियोग..
प्रकृति के साथ नये नये प्रयोग...
ये बात ना तुमने जानी है..
ना अभी तक पहचानी है...
शिक्षा बना कर व्यापार सब कुछ उजाड़ कर...
खतरे मे दुनिया का हर प्राणी है....
फिर भी हम बेशर्म हो कर...
लिख रहे अपने ही अंत की कहानी है...
अंतिम क्षण अपने प्राणों की...
भगवान से मांगनी भिक्षा है....
ये प्रश्न ही आज परीक्षा है की क्या साक्षरता ही शिक्षा है...
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